Friday, 13 September 2019

आर्थिक संकट के दौर में रिटायर होने वाले लोग क्या करें?

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आर्थिक संकट के समय रिटायरमेंट
अगर आप रिटायर होने वाले हैं तो आर्थिक संकट का यह दौर शायद गलत समय पर आया है. रिटायरमेंट के लिए आपने अभी तक जो बचत की है, उस पर मौजूदा आर्थिक हालात का असर पड़ सकता है. सवाल यह है कि आपको इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?
घबराने की नहीं है जरूरत
फाइनेंशियल प्लानर का कहना है कि रिटायर होने वालों को इस बात से परेशान होने की जरूरत नहीं है. लैडर 7 फाइनेंशियल एडवाइजर्स के फाउंडर सुरेश सदगोपन ने बताया, "लोग अक्सर भूल जाते हैं कि प्लानिंग रिटायरमेंट के साथ खत्म नहीं हो जाती. यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जो करियर खत्म होने के 20-30 साल बाद तक चलती रहती है. अगर लंबी अवधि पर गौर किया जाए, तो फिलहाल के हालात का उस पर असर नहीं पड़ता."
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शुरुआती जरूरतों पर दें ध्यान
प्लानर्स का कहना है कि लोगों को अपने वित्तीय लक्ष्य पूरे करने के लिए एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए. उन्हें शेयर बाजार के हालात से प्रभावित नहीं होना चाहिए. सबसे पहला कदम यह होना चाहिए कि शुरुआती वित्तीय जरूरतों को सुरक्षित करें.
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लिक्विड फंड में रखें रकम
गेटिंग यू रिच के फाउंडर और सीईओ रोहित शाह ने ईटी से कहा, "पहले रिटायरमेंट के शुरुआती साल की जरूरतों पर फोकस करें. यह देखें कि आपके पोर्टफोलियो से वह पूरा होगा या नहीं." इस पैसे को लिक्विड फंड की तरह रखा जा सकता है.
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निवेश जारी रखें
रिटायरमेंट के लिए जुटाई गयी रकम या प्रोविडेंट फंड का इस्तेमाल शुरुआती सालों में अपनी जरूरत में स्थिरता लाने के लिए किया जा सकता है. जिन लोगों को घर किराये या पेंशन से आमदनी हो रही है, उन्हें वित्तीय जरूरत पूरा करने में आसानी होगी. ऐसे लोगों को बचे हुए फंड से निवेश करना चाहिए.
शेयरों में थोड़ा निवेश करते रहें
TBNG कैपिटल एडवाइजर्स के संस्थापक तरुण बिरानी ने कहा, "आपको निवेश करते समय अनुशासन बनाए रखना जरूरी है." रिटायरमेंट नजदीक आने पर शेयरों में निवेश घटाने की सलाह दी जाती है. इक्विटी से पूरी तरह बाहर निकलना भी आपके लिए ठीक नहीं होगा. यह इकलौता ऐसा निवेश है, जिससे महंगाई दर की तुलना में कहीं अधिक रिटर्न मिल सकता है.
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अगले 25 साल का सोचें
रिटायर होने वाले लोगों को फिक्सड इनकम की तरफ पूरी तरह से झुकने की जरूरत नहीं है. भविष्य के लिए बचत करना सही है, लेकिन आपकी बचत पर रिटर्न इस तरह से बढ़ना जरूरी है कि आने वाले 25 साल तक आराम से गुजारा हो सके.

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जोखिम घटाने पर दें ध्यान
अपने रिस्क प्रोफाइल को समझते हुए आप शेयरों में 20-30% तक निवेश कर सकते हैं. शाह ने कहा, "रिटायर होने के बाद लोग इक्विटी को लेकर डिफेंसिव होने लगते हैं. अगर आप अभी तक एग्रेसिव अप्रोच अपना रहे थे, तो कम रिस्क वाली इक्विटी का विकल्प चुनने की कोशिश करें."
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मिड-स्मॉल कैप फंड से रहें दूर
सदगोपन का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद आपको इक्विटी हाइब्रिड फंड में निवेश करना चाहिए. उन्होंने इसके साथ कुछ रकम लार्ज और मिड कैप फंड में भी लगाने की सलाह दी. उन्होंने कहा, "अगर आप रिटायर होने वाले हैं या हो चुके हैं, तो मिड या स्मॉल कैप फंड में निवेश न करें."
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सावधानी जरूरी है
आपको इस स्टेज पर कर्ज को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए. बिरानी ने सुझाव दिया, "क्रेडिट से बचें. केवल हाई ग्रेड क्रेडिट देने वाले बैंक या पीएसयू फंड का सहारा लें." जो लोग रिटायरमेंट प्लानिंग में रिस्क का ध्यान देते हुए एसेट में निवेश करते हैं, उन्हें भविष्य में ज्यादा परेशानी नहीं होती. जो एग्रेसिव रिटर्न की उम्मीद लगाते हैं, उन्हें अपने निवेश पर दोबारा गौर करना पड़ता है.


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Wednesday, 11 September 2019

रिटायरमेंट के बाद खाली हाथ नहीं रहना चाहते हैं तो निवेश के ये 3 तरीके अपनाएं

अच्छी चिकित्सा सुविधाओं के चलते शहरी इलाकों में औसत उम्र बढ़ी है. 80 और 90 साल की उम्र के लोगों को देखना असामान्य नहीं रहा है.
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अपने रिटायरमेंट की प्लानिंग में महंगाई की दर को जरूर ध्यान में रखें.
रिटायर हो चुके लोगों के सामने एक बड़ी चुनौती होती है. वे इस बारे में लगातार सोचते हैं कि उनकी रिटायरमेंट सेविंग्स जीवनभर कैसे चले. यहां तक कि अगर कोई व्यक्ति बड़ी समझदारी से काम करते हुए बचत करता है और ठीकठाक रकम जुटा लेता है तो भी गारंटी नहीं है कि रिटायरमेंट के बाद लंबे समय तक वह रकम चलती रहे. इसके पीछे तीन मुख्य बातें होती हैं. पहला, रिटायरमेंट के बाद लंबा जीवन, जल्दी रिटायरमेंट और घटती ब्याज दरें.

यूएन पॉपुलेशन फंड की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जीवन प्रत्याशा (लाइफ एक्सपेक्टेंसी) में बढ़ोतरी हुई है. 1994 में यह 60 साल थी. 2019 में यह बढ़कर 69 साल हो गई है. यह औसत उम्र है.

च्छी चिकित्सा सुविधाओं के चलते शहरी इलाकों में औसत उम्र बढ़ी है. 80 और 90 साल की उम्र के लोगों को देखना असामान्य नहीं रहा है. भविष्य में स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है.

इसने जरूरी कर दिया है कि अब आप रिटायरमेंट के बाद 20-25 साल को लेकर प्लानिंग करें. पहले इसके लिए 15-20 साल काफी होते थे. यह भी देखने में आया है कि लोग अब जल्दी रिटायर हो रहे हैं. इसका मतलब है कि उनके पास बचत करने के लिए कम समय है जबकि खर्च करने के लिए ज्यादा वक्त है.

ये सभी बातें ऐसे समय में हो रही हैं जब फिक्स्ड इनकम की ब्याज दरों में गिरावट जारी है. निवेश के परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है. एफडी पर सीनियर सिटीजन को करीब 7 फीसदी ब्याज मिल रहा है. सबसे आकर्षक विकल्प सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम पर ब्याज की दरें 8.6 फीसदी हैं. इसमें भी जल्द बदलाव संभव है.

हमने तीन विकल्पों की पहचान की है जिनका फाइनेंशियल प्लानर सुझाव देते हैं. ये रणनीतियां रिटायरमेंट में मंथली इनकम के लिए एक करोड़ रुपये का इस्तेमाल कैसे करती हैं, यह भी हमने बताया है. इन 3 स्ट्रैटेजी में फिक्स्ड इनकम विकल्पों पर निर्भर करने वाली ट्रेडिशनल एप्रोच, थोड़ा जोखिम लेने वाली मॉडरेट एप्रोच और बकेट स्ट्रैटेजी शामिल हैं.

क्या 1 करोड़ रुपये काफी है?
आज रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए एक करोड़ रुपये की रकम काफी लगती है. कोई 60 साल का होने पर एन्युटी प्लान खरीदता है तो उसे जीवनभर करीब 70,000 रुपये की मासिक पेंशन मिल सकती है. लेकिन, निवेशक की मौत पर इसमें उत्तराधिकारियों को मूल रकम वापस नहीं मिलती है. अगर वह चाहता है कि उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को एक करोड़ रुपये की मूल रकम मिल जाए तो उसकी इनकम करीब 52,000 रुपये प्रति महीना होगी. यह ठीक लगता है, है न?

लेकिन, सच में यह काफी नहीं है. 52,000 रुपये की पेंशन आज भले काफी लग रही हो, पर यह स्थिति ऐसी ही नहीं रहेगी. हर गुजरते दिन के साथ महंगाई खर्चों को बढ़ा देती है. यहां तक कि मामूली महंगाई की दर का भी असर पड़ता है. सालाना 6 फीसदी महंगाई की दर भी 10 साल में मासिक खर्चों को 90,000 रुपये पहुंचा देगी. 20 साल में यह 1.6 लाख रुपये हो जाएगी.

दूसरे शब्दों में कहें तो 20 साल में एन्युटी से पेंशन आज के मुकाबले एक-तिहाई रह जाएगी. आज रिटायरमेंट प्लानिंग में महंगाई को ध्यान नहीं रखने वाले व्यक्ति को बुढ़ापे के साल गरीबी में बसर करने पड़ सकते हैं.
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Monday, 9 September 2019

इस तरीके से आप खुद ही शुरू कर सकते हैं सिप में निवेश

आई-सिप इंस्ट्रक्शन को किसी भी समय रोक सकते हैं. इसके ल‍िए निवेशक को अपने नेटबैंकिंग पोर्टल से बिलर को डिलीट करना होगा.
आई-सिप इंस्ट्रक्शन को किसी भी समय रोक सकते हैं.
 इसके ल‍िए निवेशक को अपने नेटबैंकिंग पोर्टल
से बिलर को डिलीट करना होगा.
म्यूचुअल फंडों में निवेश करना दिनोंदिन आसान और सुविधाजनक हो रहा है. सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) को म्यूचुअल फंडों में निवेश के लिए काफी सुरक्षित तरीका माना जाता है. अब आप घर बैठे म्यूचुअल फंड में सिप को सेट कर सकते हैं. आई-सिप इसका आसान और सुरक्षित तरीका है. इसके जरिए ऑनलाइन सिप शुरू किया जा सकता है. इसके लिए एसेट मैनेजमेंट कंपनी के दफ्तर जाने की जरूरत नहीं है. न ही सिप करने के लिए फिजकल फॉर्म और प्रूफ अटैच करने की आवश्यकता है. क्या है जरूरी आई-सिप सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए ये चीजें होनी चाहिए: -केवाईसी कम्लायंस -बैंक में खाता -इंटरनेट बैंकिंग सुविधा आई-सिप फॉर्म भरना होगा इसके लिए निवेशक को म्यूचुअल फंड की वेबसाइट इस्तेमाल करनी होगी. इसमें आई-सिप फॉर्म ऑनलाइन भरना होगा. फॉर्म में पैन, बैंक अकाउंट नंबर और सिप से जुड़े ब्योरे मसलन स्कीम का नाम, सिप की रकम, सिप की फ्रीक्वेंसी भरने पड़ते हैं. निवेशक फॉर्म में नॉमिनेशन भी रजिस्टर कर सकता है. साथ ही म्यूचुअल फंड एजेंट का एआरएन जोड़ सकता है.

यूनीक रजिस्ट्रेशन नंबर (URN) भी जनरेट करें सभी जानकारियां भर और जमा हो जाने के बाद यूआरएन जेनरेट होता है. इसे निवेशक की ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है. यह निवेशक की इंटरनेट बैंकिंग वेबसाइट पर आई-सिप रजिस्टर करने के लिए रेफरेंस नंबर के तौर पर काम करता है. नेट बैंकिंग पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन 10 दिनों के भीतर यूआरएन जेनरेट होता है. निवेशक को अपने बैंक के नेटबैंकिंग पोर्टल का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ती है. बिल पेमेंट सेक्शन में निवेशक 'न्यू बिलर' के तौर पर म्यूचुअल फंड जोड़ सकता है. यूआरएन को तभी डालना चाहिए जब ऐसा करने के लिए कहा जाए. एक बार बिलर डिटेल जुड़ने पर बैंक वेरिफिकेशन के बाद बिलर एक्टिवेट कर देता है. बिलर डिटेल जोड़ते हुए निवेशक सिप की किस्त के लिए ऑटो डेबिट इंस्ट्रक्शन दे सकता है. किन बातों का रखें ध्यान -आई-सिप रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया केवल एक सिप इंस्ट्रक्शन के लिए है. किसी और स्कीम को जोड़ने के लिए अलग आई-सिप रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा करना होगा. -आई-सिप इंस्ट्रक्शन को किसी भी समय रोक सकते हैं. इसके ल‍िए निवेशक को अपने नेटबैंकिंग पोर्टल से बिलर को डिलीट करना होगा. इस पेज की सामग्री सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग (सीआईईएल) के सौजन्य से. गिरिजा गादरे, आरती भार्गव और लब्धि मेहता का योगदान.

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Thursday, 5 September 2019

इस तरह करें रिटायरमेंट प्लानिंग; बुढ़ापा गुजरेगा शानदार, हर समय जेब में होंगे पैसे


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Retirement Planning: रिटायरमेंट की योजना पहले से ही बनाए रखना बेहतर फैसला होता है. हालांकि उससे भी बेहतर फैसला यह होगा कि आप रिटायरमेंट के बाद अपनी वित्तीय जरूरतों पर अभी से स्पष्ट हो जाएं. अधिकतर लोगों का मानना है कि उन्हें रिटायरमेंट के बाद अधिक पैसों की जरूरत नहीं पड़ने वाली है. हालांकि ऐसा सोचना सही नहीं है. रिटायरमेंट के बाद न सिर्फ आपकी जरूरतों बल्कि आपकी लाइफ स्टाइल भी आपके खर्च निर्धारित करती है. ऐसे में पहले से ही सुनिश्चित हो जाना चाहिए और रिटायरनमेंट प्लानिंग में रिटायरमेंट के बाद सभी प्रकार के खर्चों की भी गणना कर लेनी चाहिए. नीचे कुछ मानक दिए गए हैं जिनके आधार पर आप अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग को एक बार फिर तय कर सकते हैं.

रिटायरमेंट के बाद की लाइफस्टाइल

ऐसा जरूरी नहीं है कि आप रिटायरमेंट के बाद आराम ही करना चाहिए, कुछ लोग रिटायरमेंट के बाद भी एक्टिव रहना चाहते हैं. रिटायरमेंट के बाद आप अपने ट्रैवलिंग के शौक से लेकर बहुत सी ऐसी एक्टिविटी करने की सोच रहे हों जो आप रोजगार अध्यक्ष रहते हुए नहीं कर पाएं हों तो ऐसी किसी भी परिस्थिति के लिए आपको सेविंग पर अधिक फोकस करना पड़ेगा. सेविंग का जनरल रूल ऑफ थंब है कि भविष्य के लिए बचत करने के लिए 70 फीसदी प्री-टैक्स इनकम को टारगेट करना चाहिए लेकिन अगर आप रिटायरमेंट के बाद भी एक्टिव रहना चाहते हैं तो यह 90 फीसदी होना चाहिए.

स्वास्थ्य
रिटायरमेंट प्लानिंग में स्वास्थ्य बहुत महत्त्वपूर्ण फैक्टर है लेकिन अधिकतर लोग इसे अधिक गंभीरता से नहीं लेते हैं. अधिकतर लोग यह मानकर चलते हैं कि जब वे रिटायर होंगे तो उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं होगी लेकिन वास्तविक में स्थिति इसके ठीक उलट होती है. हो सकता है कि आपको या आपके जीवनसाथी को बड़ी स्वास्थ्य समस्या हो जिसे जिंदगी भर उपचार की जरूरत पड़ेगी, ऐसी परिस्थिति में आपको पहले से प्लानिंग करके चलना है और बड़ी राशि भविष्य के लिए जुटाकर रखनी है.

परिवार

आप शादीशुदा हैं या नहीं, आपके पास बच्चे हैं या नहीं, इसके आधार पर अपने रिटायरमेंट की प्लानिंग करें. आपको अपने और अपने जीवनसाथी के लिए इतनी राशि का इंतजाम पहले ही कर लेना चाहिए ताकि देखभाल के भी खर्च आराम से भुगतान कर सकें.

वित्तीय सलाहकार से सलाह

खुद से सभी निवेश की योजना बनाने की बजाय वित्तीय सलाहकार के साथ मिलकर इस पर काम करना अधिक बेहतर है. किसी इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के साथ मिलकर फाइनेंसियल प्लानिंग और एसेट अलोकेशन के निर्णय से आप अपनी बचत और इन्वेस्टमेंट गोल को आसानी से हासिल कर सकेंगे. अगर आपने अभी तक किसी इन्वेस्टमेंट एडवाइजर की सलाह नहीं ली है तो अब जरूर ले लें. उनकी मदद से आपको अपने पोर्टफोलियो पर रिटर्न बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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Tuesday, 3 September 2019

रिटायरमेंट के बाद क्या करें, कैसे कमाएं

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सेवानिवृत्ति के बाद भी खुद को व्यस्त रखने के साथ इनकम हासिल करने के कदम बढ़ाए जा सकते हैं। जब हम रिटायरमेंट के बारे में सोचते हैं तो घड़ी की सुइयों से बेपरवाह जिंदगी की तस्वीर बनाते हैं। एक खुशहाल रिटायरमेंट वाला जीवन ऐसा होना चाहिए, जो नौकरी या कारोबार में लंबे समय तक रहने के बाद आप अपनी अधूरी इच्छाओं को पूरा करने के साथ जिएं। अगर संभव हो तो आप रिटायरमेंट के बाद भी अपनी दिलचस्पी के मुताबिक काम कर इनकम का एक नया सोर्स बना सकते हैं। हम आपको यहां कुछ ऐसे आइडिया के बारे में बता रहे हैं, जो रिटायरमेंट के बाद आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं।

अपना बिजनेस शुरू करें
अगर आप हमेशा अपने जहाज के कप्तान बनना चाहते थे, तो रिटायरमेंट आपके लिए अपने उस सपने को पूरा करने का मौका भी देता है। आप अपनी रुचि या जोश को एक बिजनस में भी बदल सकते हैं। हमारे एक क्लायंट ने हाल में एक बड़ी कंपनी में सीनियर मैनेजमेंट पोजिशन छोड़कर एक अकाउंटिंग पार्टनरशिप फर्म शुरू की है। एक अन्य मित्र ने परंपरागत भारतीय खिलौने और गेम्स बनाने और बेचने वाली फर्म लॉन्च की है। आप एक स्मॉल स्केल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट घर पर लगाकर ई-कॉमर्स साइट्स के जरिए अपने प्रॉडक्ट्स बेच सकते हैं। इन साइट्स की पहुंच ज्यादा होती है और इन पर बिक्री करने की कॉस्ट भी कम रहती है।

अपने कौशल से उठाएं लाभ
रिटायर्ड प्रफेशनल्स के पास अपनी फील्ड्स की काफी जानकारी होती है। इसी वजह से बहुत से लोग रिटायरमेंट के बाद कंसल्टेंसी भी शुरू करते हैं। कुछ लोग पुरानी कंपनियों के साथ भी असाइनमेंट्स के आधार पर जुड़ जाते हैं। कंसल्टिंग से आपको अपनी रफ्तार के मुताबिक काम करने की फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है। साख बनने और क्लायंट्स की संख्या में वृद्धि के साथ आपकी इनकम में भी इजाफा होता है।

लिखने-पढ़ने का मजा
मेरी आंटी एक बड़ी ऐडवर्टाइजिंग कंपनी से क्रिऐटिव डायरेक्टर के तौर पर रिटायर हुई थीं। उन्हें लिखने और नई जगहों पर घूमने का शौक था। रिटायरमेंट के बाद वह ट्रैवल राइटर बन गईं। इससे उन्हें दुनिया में कई खूबसूरत जगहों पर जाने का मौका मिला और वहां की जानकारी देने वाले उनके आर्टिकल्स को प्रकाशित करने वाली मैगजींस उन्हें अच्छा पेमेंट भी करती थीं।

सामाजिक कार्यों का दायरा
अगर इनकम हासिल करना आपका मुख्य उद्देश्य नहीं है तो आप अपनी एक्सपर्टाइज और नॉलेज का इस्तेमाल एनजीओ के साथ जुड़कर भी कर सकते हैं। बहुत से चैरिटेबल संगठनों को अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए एक्सपर्ट्स की मदद की जरूरत होती है। इससे आपको पहचान तो मिलेगी ही, साथ ही आपको किसी उद्देश्य के लिए काम करने का संतोष भी होगा। आप अपना एनजीओ भी शुरू कर सकते हैं। 

ब्लॉगिंग करें
यह सबसे मजेदार, आसान और रिटायर्ड पर्संस के लिए कमाईवाला माध्यम है। कम्प्यूटर इन दिनों सभी के घरों में होता है। चाहें तो अपने लिए लेपटॉप ले लीजिए, 25000 में आपका इंतजाम हो जाएगा। एक कम्प्यूटर को 5 लोग शेयर कर सकते हैं। शेड्यूल बनाकर। अपना ब्लॉग शुरू कीजिए और अपने अनुभवों के आधार पर लोगों को गाइड कीजिए। अपनी जिंदगी की कहानियां लिखिए, अपने मित्रों के बारे में लिखिए। आफिस के कुछ घटनाक्रम लिखें जो प्रेरणा देते हों या सबक सिखाएं। राजनीति की समीक्षा करें या समाज के लिए संदेश दें। जो दिल में आए करें। गूगल एडसेंस लोकप्रिय ब्लॉगर्स को पेमेंट भी करता है। वो भी डालर्स में। अत: मंहगाई बढ़ने की टेंशन भी नहीं। मंहगाई तो तभी बढ़ेगी ना जब डॉलर के दाम बढ़ेंगे और यदि डॉलर के दाम बढ़े तो आपकी इनकम अपने आप बढ़ जाएगी। कई लोग नौकरियां छोड़कर ब्लॉगिेंग कर रहे हैं। तकनीकी विषय का एक ब्लॉगर प्रतिदिन 3 घंटे काम करता है और प्रतिमाह 18 लाख रुपए कमाता है। 


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Friday, 30 August 2019

आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग को नुकसान पहुंचाती हैं ये 4 गलतियां


retirement plan
रिटायरमेंट प्लानिंग बहुत जरूरी है. इसके जरिये यह पता लगाते में मदद मिलती है कि रिटायरमेंट के लिए अभी आपको कितनी बचत करनी चाहिए और कहां निवेश करना चाहिए. लेकिन, यह इन पहलुओं तक ही सीमित नहीं है. इसके साथ जुड़े अन्य मसलों में चूक होने पर रिटायरमेंट की प्लानिंग पटरी से उतर सकती है. यहां हम रिटायरमेंट प्लानिंग से जुड़ी उन 4 गलतियों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे बचना चाहिए.


यहां हम रिटायरमेंट प्लानिंग से जुड़ी उन 4 गलतियों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे बचना चाहिए. 
1. अन्य लक्ष्यों की अनदेखी 
बेशक रिटायरमेंट की प्लानिंग महत्वपूर्ण है. लेकिन, अन्य लक्ष्यों की अनदेखी नहीं करें. सेबी पंजीकृत इंवेस्टमेंट एडवाइजर गौरव मश्रूवाला कहते हैं, "रिटायरमेंट प्लानिंग के साथ अन्य खर्चों, मसलन बच्चों की उच्च शिक्षा, उनकी शादी इत्यादि के लिए भी प्लान करना चाहिए."

ऐसे लक्ष्यों के लिए प्लानिंग न करने पर आपके रिटायरमेंट का लक्ष्य खटाई में पड़ सकता है. एचडीएफसी पेंशन प्लान के सीईओ सुमित शुक्ला कहते हैं, "अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्यों की प्लानिंग न करने पर आप इन्हें पूरा करने के लिए रिटायरमेंट की रकम का इस्तेमाल कर सकते हैं. रिटायरमेंट फंड का रुख बदलना बड़ी गलती बन सकता है." बच्चों की शिक्षा के अलावा देखा गया है कि लोग घर खरीदने, बच्चों की शादी, मेडिकल इमरजेंसी इत्यादि के लिए ईपीएफ का पैसा निकाल लेते हैं. इससे रिटायरमेंट की जरूरतों के लिए बहुत कम पैसा बचता है.

2. नियमित आमदनी की प्लानिंग नहीं 
अपने रिटायरमेंट को सुखद बनाने के लिए जरूरी है कि नियमित आमदनी का जरिया बना रहे. जुटाई गई रकम से धीरे-धीरे पैसा निकालना बहुत अच्छा विकल्प नहीं है. एन्युटी में निवेश कर नियमित इनकम बनाई जा सकती है. हालांकि, इनका सालाना रिटर्न बहुत कम करीब 6.5 फीसदी होता है. इस पर टैक्स भी लगता है. वैसे, जानकार सलाह देते हैं कि रिटायरमेंट की रकम के एक हिस्से को एन्युटी में निवेश करना चाहिए. यूटीआई रिटायरमेंट सॉल्यूशंस के सीईओ बलराम भगत कहते हैं, "एन्युटी जिंदगी भर के लिए गारंटीशुदा इनकम है. अपने कुछ पैसे को इसमें लगाने में समझदारी है. फिर भले ही एन्युटी से मिलने वाला रिटर्न थोड़ा कम ही क्यों न हो." मर्सर में इंडिया बिजनेस लीडर (रिटायरमेंट) अनिल लोबो भी इस बात से सहमति जताते हैं. वह कहते हैं, "नियमित गारंटीशुदा इनकम से रिटायर हो चुके लोगों को बड़ी राहत पहुंचती है." 60 साल में तो ज्यादातर लोग अपने पैसे को मैनेज कर लेते हैं. लेकिन, बाद के वर्षों में यह काम कर पाने में मुश्किल पेश आती है. लोबो के अनुसार, "चूंकि एन्युटी से मिलने वाला रिटर्न कम होता है और इस पर टैक्स भी लगता है. इसलिए इस पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहा जा सकता है."

इसे देखते हुए बाकी की रकम ग्रोथ आधारित एसेट में निवेश करने की जरूरत है. इससे रिटायरमेंट की रकम लंबे समय तक चल पाती है.

3. रिटायरमेंट के बाद की प्लानिंग नहीं 
एक्सपर्ट कहते हैं कि रिटायरमेंट की उम्र आते ही रिटायरमेंट की प्लानिंग रुक नहीं जानी चाहिए. मश्रूवाला कहते हैं, "रिटायरमेंट के बाद के चरण की प्लानिंग करना बेहद अहम है. वित्तीय जरूरतें क्रिकेट में तीन स्टंपों की तरह हैं. इसमें लिक्विडिटी (इमरजेंसी के लिए), नियमित इनकम और बची हुई रकम की ग्रोथ शामिल हैं. कमाई के चरण में जैसे कोई 5-6 महीने का इमरजेंसी फंड बनाता है. ठीक वैसे ही रिटायरमेंट के बाद भी ऐसा ही इमरजेंसी फंड होना चाहिए."

 4. सभी कामों से छुट्टी 
रिटायरमेंट के बाद किसी न किसी काम में लगे रहना जरूरी है. एक्सपर्ट कहते हैं कि जो लोग रिटायरमेंट के बाद सभी कामों से छुट्टी कर लेते हैं, उनके बीमार पड़ जाने की आशंका ज्यादा होती है. रिटायरमेंट के दौरान बोरियत से न‍िपटना कठिन होता है. इसके चलते तनाव आता है. लोबो कहते हैं, "वैसे भारत में बुजुर्गों के लिए मौके कम हैं. पर, फिर भी कुछ काम मिल सकता है. रिटायर हो चुके लोगों को यह काम लेना चाहिए."


Retirement planning is the process of determining retirement income goals and the actions and decisions necessary to achieve those goals. Retirement planning includes identifying sources of income, estimating expenses, implementing a savings program, and managing assets and risk.

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Tuesday, 27 August 2019

क्यों जरुरी है रिटायरमेंट योजना?

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इससे पहले कि हम चर्चा शुरू करे एक सफल retirement planning (रिटायरमेंट प्लानिंग) की योजना पर, यह जानना जरुरी है की retirement planning क्या है और हमे क्यों करनी चाहिए?

Retirement planning से हमारा तात्पर्य है रिटायरमेंट के लिए बचत के आवंटन की और यह जीवन की महत्वपुर्ण निर्णयों में एक है। Retirement planning का असल मकसद है आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करना । हमे रिटायरमेंट के लिए बचत इसलिए करना चाहिए क्योकि यह हमारे स्वयं के जीवन के विषय में है।

हम सब आराम से retirement करना चाहते है परन्तु एक सफल रिटायरमेंट लक्ष्य को हासिल करने में विभिन्न
समस्याएँ है। समझदारी इसी में है की जल्द से जल्द निवेश शुरू करे वरना रिटायरमेंट के बाद होने वाली कठिनाई को झेलने के लिए तैयार रहे। शुरुवात में थोड़ी थोड़ी बचत करना शुरू करे, निवेश के लिए योजना बनाये और एक लम्बे समय की प्रतिबद्धता के साथ शुरू करे।

आपको retirement के लिए planning करना इन कारणवश जरुरी है-

१. रिटायरमेंट को अपनी तरह से व्यतीत करने के लिए

आप अपने retirement को कैसे बिताना चाहते है, यह निर्भर करता है की आप अपने जीवन में कितने पैसे बचत और निवेश किये है। जीवन में सभी लोगो का एक लक्ष्य होता है और रिटायरमेंट एक सही समय है अपने सारे लक्ष्य को सक्षम बनाने का और सारे सपनो को पूरा करने का परन्तु इसके लिए आपको आर्थिक तौर पर मजबूत होने की जरुरत है। वरना हमारी बुनियादी जरूरतों (जैसे की रोटी, कपडा और मकान) को पूरा करने की समस्या के बीच ही हम उलझे रहेंगे और सपने केवल सपने बनकर ही रह जायेंगे।
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retirement के लिए बचत करने का एक और महत्वपूर्ण कारण है आपके बच्चे। ज्यादातर लोगो को वित्तीय कठिनाईओ से गुजरना पड़ता है क्योकि उनके माता-पिता अपने रिटायरमेंट के लिए उपयुक्त योजना बनाने में असक्षम रहे थे। उनके महंगी दवाइया और बाकि खर्च को संभालना अपने खुद के परिवार के साथ एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य है आजके युग में माता पिता का भी यह कर्तब्य बनता है की अपनी retirement planning बनाये और सारा भारअपने बच्चो पर न थोप दे।
माता पिता होने के कारण यह जरुरी है की आप अपने बच्चो का और उनके करियर का ध्यान रखे न की अपनी वित्तीय कठिनाईओ का बोझ उनपर आने दे। इसलिए यह बहुत जरुरी है की रिटायरमेंट की बचत अपनी जीवन की शुरुवाती दौर से करना शुरू कर दे।
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माता पिता होने के कारण यह जरुरी है की आप अपने बच्चो का और उनके करियर का ध्यान रखे न की अपनी वित्तीय कठिनाईओ का बोझ उनपर आने दे। इसलिए यह बहुत जरुरी है की रिटायरमेंट की बचत अपनी जीवन की शुरुवाती दौर से करना शुरू कर दे

बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ का ख़राब होना काफी आम बात है और कई बार ऐसे परस्तिथि पैदा हो जाती है जहा आप काम करने के योग्य नहीं होते। उन परस्तिथियो में आपके द्वारा की गई बचत यह सुनिश्चित करती है की आपका अच्छा ख्याल रख्खा जा रहा हो। एक जरुरी प्रश्न यह है कि क्या आपने पर्याप्त बचत कर रख्खी है अपने भविष्य के स्वास्थ के देखभाल के लिए क्योकि यह बहुत महंगी हो सकती है और यह आपके रिटायरमेंट बचत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।



क्या आप अपने retirement के बाद भी काम करना चाहते है? यदि नहीं तो आपको अपने बचत की शुरुवात अभी से कर देनी चाहिए। जो लोग अपने रिटायरमेंट के लिए तैयारी नहीं करते उनको अक्सर अपनी परिवार के ज़रूरत के लिए काम करना पड़ता है।शायद ही ऐसा होता है की आप अपने पूरे जीवन तक कमाते रहेंगे इसलिए बचत एक बहुत ही एहम किरदार है अपने जीवन में।

ज्यादातर लोगो का यह मन्ना है की सोशल सिक्योरिटी फायदे काफी है आपके रिटायरमेंट के बाद जीवन को व्यतीत करने के लिए परन्तु ये काफी नहीं है आपके सारे रिटायरमेंट के खर्चो के लिए। ज्यादातर वित्तीय सलाहकारों का यह मन्ना है कि रिटायरमेंट के बाद एक अच्छा जीवन बिताने के लिए आपको अपने कमाई के लगभग ७०-७५% तक की जरुरत होगी।  यह देखा गया है की इन सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स से केवल ४०-४५% तक ही पूरा हो पाता है। इसी कारणवश बचत करना बहुत जरुरी है क्योकि आप पूरी तरह से इन सोशल सिक्योरिटी फायदे पर निर्भर नहीं हो सकते।

यदि आप जल्दी रिटायर होने के बारे में सोच रहे हो, तो बचत की आदत शुरू से ही ढालना जरुरी है। जितनी जल्दी आप बचत करना शुरू करेंगे उतनी ही आसानी से आप अपने लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा शुरू से ही बचत करने में यह फायदा है की यह आपको ज्यादा समय देती है अपनी सारी गलतयो को सुधारने और उन कमीयो को पहचानने के लिए जो आपके लक्ष्य को पूरा करने में बाधा ला सकती है।


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